पर्यावरण दिवस विशेष: गौरैया से लेकर गिलहरी तक... देखते-देखते कितनी चीजें गायब हो रही हैं!
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आंगन में चहकती गौरैया याद आती है. अब शायद आंगन खाली दिखते होंगे. यहां तक कि बचपन में मुंडेर पर बैठे जिस कौवे की कर्कश आवाज परेशान करती थी, वो आवाज भी अब कम ही सुनाई देती है.
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June 05, 2019 at 08:09AM
आंगन में चहकती गौरैया याद आती है. अब शायद आंगन खाली दिखते होंगे. यहां तक कि बचपन में मुंडेर पर बैठे जिस कौवे की कर्कश आवाज परेशान करती थी, वो आवाज भी अब कम ही सुनाई देती है.from Latest News अमेरिका News18 हिंदी http://bit.ly/2XpHFix
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